uniform civil code युनिफार्म सिविल कोड क्‍या है , क्‍या जरूरी है या नहीं

uniform civil code : भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की आवश्यकता पर अभी हाल ही में भारतीय कानून आयोग ने नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के माध्यम से आयोग ने भारतीय जनता, मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों और इस विषय के ज्ञानीजनों से यूनिफॉर्म सिविल कोड पर उनके विचारों को जानने का अनुरोध किया है।

“अगर आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं तो आर्टिकल के अंत में दी गई लिंक पर जा कर कर सकते हैं या आप मेल के जरिए भी अपना सुझाव दे सकते हो जिसकी ईमेल आईडी भी आपको आर्टिकल में मिल जाएगी।”

आप चाहे इसके पक्ष में हो या विपक्ष में, आप अपना सुझाव देने के लिए स्वतंत्र हैं।

आप सभी से अनुरोध है कि इस विषय पर कुछ भी राय देने से पहले समान नागरिक संहिता के नियमों को, इसके सकारात्मक और नकारात्मक सभी पहलुओं को जान लेवें। आज हम इस आर्टिकल में इन्हीं बिंदुओं की पूरी निष्पक्ष जानकारी आपको मिल जाएगी।

अगर आप लॉ कमीशन द्वारा दी गई लिंक पर या ईमेल पर अपना कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे कि आपका सुझाव टॉपिक से संबंधित ही होना चाहिए, आपकी भाषा संयमित रखनी चाहिए,

आपके सुझाव पर विचार किया जाएगा और अगर आप कोई अभद्र व्यवहार करेंगे तो इस पर आपको विपरीत परिणाम भी भुगतने सकते हैं। इसलिए कुछ भी लिखने से पहले ध्यान से चेक कर ले।

uniform civil code विस्‍तृत जानकारी :

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यूनिफार्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता ) क्‍या है

समान नागरिक संहिता कानून पूरे देश में एक समान कानूनी सेट का प्रयोग करता है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेन, और विरासत कानून जैसे मामलों में समानता सुनिश्चित की जाए। भारतीय संविधान की धारा 44 में एक समान नागरिक संहिता की स्थापना के लिए कहा गया है, जो देश के सभी क्षेत्रों में नागरिकों के समान नागरिक पहचान के अधिकार को सुरक्षित करने की मांग करती है।

.भारतीय संविधान के अनुसार राज्‍य के नीति निर्देशक तत्‍वो मे अनुच्‍छेद 44 को शामिल किया गया है। जब भारत नये स्वतंत्र देश के रूप में अपना संविधान तैयार कर रहा था, तो उसके पास संविधान में उल्लिखित सभी प्रावधानों को लागू करने के लिए सीमित संसाधन और साधन थे। इसलिए, राज्‍य के नीति निर्देशक तत्‍वो मे उल्‍लेखित अनुच्छेद भविष्य में लागू करने के सिद्धांत के आधार पर संविधान में जोड़े गए।

इसका अर्थ है कि आने वाली सरकारें समय के साथ-साथराज्‍य के नीति निर्देशक तत्‍वो मे अनुच्छेद में उल्लिखित प्रावधानों को लागू करने की दिशा में काम करेंगी।

इसी विचार पर आधारित रहते हुए, वर्तमान सरकार का इरादा है कि यह विधेयक पेश किया जाए।

हालांकि, यह अनुच्छेद पहले लाया नहीं गया क्योंकि अनुच्‍छेद 44 के अनुसार, इसमें उल्लिखित नियमों को प्रयोजनस्वरूप प्रभावी करना अनिवार्य नहीं है। सरकार को इन्हें अपनी इच्छा के अनुसार कार्यान्वित करने का विकल्प है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।

भारत के हर क्षेत्र मे विविधता , समान नागरिक संहिता (UCC) की धारणा एक महत्वपूर्ण विवाद और चर्चा का विषय रही है। UCC एक समान संगठन की विचारधारा प्रस्तावित करती है, जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेन जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए सभी नागरिकों के लिए धार्मिक संबंधों से अनदेखा करते हुए समान नियमों की व्यवस्था करता है।

यह लेख भारत में समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन से जुड़े महत्व, लाभ और चुनौतियों का पता लगाने का उद्देश्य रखता है।

समान नागरिक संहिता के प्रभाव

समानता और लिंग न्याय: समान नागरिक संहिता के लागू होने के एक मुख्य प्रभाव के रूप में लिंग समानता को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य है कि व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद भेदभावपूर्ण अभ्यासों को समाप्त किया जाए और सभी व्यक्तियों के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित किए जाएं।

एकता और राष्ट्रीय एकीकरण: समान नागरिक संहिता, सामान्य नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचे प्रदान करके एकता और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका उद्देश्य है धार्मिक अभ्यासों पर आधारित भेदभाव को कम करना।

कानूनी प्रणाली की सरलीकरण: समान नागरिक संहिता के लागू होने से, एक ही संहिता से अनेक व्यक्तिगत कानूनों को बदलकर सरल किया जाएगा। यह कानूनी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, जटिलताओं को कम करने और सामान्य जनता के लिए पहुंचने वाले बनाएगा।

धर्मनिरपेक्षता: समान नागरिक संहिता धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के साथ संगत है। इसका उद्देश्य है व्यक्तिगत मामलों को धर्मिक अभ्यासों से अलग करके धार्मिक अभ्यासों को एक सेक्युलर कानूनी ढांचे से नियंत्रित करना। इससे राष्ट्र की सेक्युलर ढांचा बनाए रखने का समर्थन किया जाता है।

विवाद और चुनौतियाँ


समान नागरिक संहिता को लागू करने के बावजूद इसका सामर्थ्य और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कुछ विवाद और चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:

धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता: समान नागरिक संहिता धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्यासों को उल्लंघन कर सकती है, क्योंकि व्यक्तिगत कानूनों में धार्मिक समुदायों की गहरी जड़ें होती हैं। समानता और सांस्कृतिक विविधता के बीच संतुलन स्थापित करना महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक विरोध: समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक विरोध हो सकता है, क्योंकि इसके प्रभाव से कुछ विशेष समुदायों को अस्वीकार किया जा सकता है। व्यापक समझदारी और सामर्थिक संवाद के माध्यम से इन विरोधों को पहचानना और सुलझाना आवश्यक है।

कानूनी विवाद: समान नागरिक संहिता के लागू होने के बावजूद, कानूनी विवाद उठ सकते हैं जहां इसके नियमों और प्रावधानों के अर्थ और व्याख्या पर असहमति हो सकती है। सुविधाजनक कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से इन विवादों को समाधान किया जा सकता है।

एक तरफ जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय समान नागरिक संहिता को अनुच्छेद 25 का हनन मानते हैं,जो धर्म को मानने और उसका पालन करने की स्‍वतंत्रता देता है तो वहीं इसके पक्षकार समान नागरिक संहिता की कमी को अनुच्छेद 14 का उल्‍लंघन बताते है जिसके अनुसार समता , समानता का जिक्र किया गया है ।

यूनिफॉर्म सिविल कोड कहाँ -कहॉं पर लागू:

भारत में समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात समय-समय पर उठती रहती है, राज्य स्तर पर भिन्न-भिन्न राज्य सरकार इस बिल को लागू करने का प्रयास करते रहते हैं। भारत में फिलहाल सिर्फ गोवा ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू हुआ है, वह भी जबसे गोवा राज्य पुर्तगाल से आज़ाद हुआ था सन् 1961 में, तबसे यह नियम लागू है।

पिछले दिनों उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर शामी ने भी अपने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही है।

इसके अलावा भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांगलादेश में नागरिक संहिता लागू है।

विश्व के अन्य देश जैसे अमेरिका, आयरलैंड, इंडोनेशिया, तुर्की, मलेशिया समेत 115 देशों में समान नागरिक संहिता लागू है।

क्‍या आप Uniform Civil Code पर अपना सुझाव देना चाहते है:

21वीं लॉ कमीशन ने 2018 में अपनी कार्यकाल समाप्त किया है। पहले, लॉ कमीशन ने यह बताया था कि वर्तमान में इस नियम को लागू करने की न तो आवश्यकता है और न ही जरूरत। इसके बजाय कानुनी प्रक्रियाओ को संहिता बद्ध करने की आवश्‍यकता है जिससे समाज मे फैली रूढि़वादिता के कारण कोई मुश्किल न आए ।

वर्तमान में भारत में 22वीं लॉ कमीशन कार्यरत है। जिन्‍होने एक बार फिर इस विषय पर संज्ञान लेने का निर्णय किया है उसी प्रक्रिया मे आयोग ने आम जनता , मान्‍यता प्राप्‍त संगठनो और अन्‍य विद्वानो से अपना सुझाव मांगा है

विधी आयोग की Email id —-membersecretary-lci@gov.in पर मेल भी कर सकते है

या फिर आप नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर के सामान्‍य जानकारी सही सही भर कर भी अपने सुझाव दे सकते है –

you can check below image of screen :

Uniform Civil Code
submit views on Uniform Civil Code

कृपया सभी जानकारी सावधानीपूर्वक प्रदान करें और समान नागरिक संहिता के बारे में अपने विचार सबमिट करें, किसी के खिलाफ अश्लील शब्दों का उपयोग न करें क्योंकि इससे भविष्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस बात को ध्यान में रखें।

भारत में समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन से समानता, न्याय और सामाजिक समानता की एक युग प्रारम्भ की संभावना होती है। धार्मिक सीमाओं को पार करते हुए और जाति भेद को समाप्‍त करते हुए, यह संहिता देश के धर्मनिरपेक्ष संरचना को मजबूत बनाएगी और एक समावेशी और पहुंचने योग्य कानूनी प्रणाली को बढ़ावा देगी।

हालांकि, इस सुधार को संवेदनशीलता के साथ करना आवश्यक है, धार्मिक अभ्यासों की विविधता को ध्यान में रखते हुए और सभी स्तरों के संलग्न होने वाले सभी हितधारकों की परामर्श को ध्‍यान में रखते हुए ही इस पर कोई निर्णय लेना चाहिए । सतर्क विचार, कानूनी सुधार और जनता के जागरूक होने के साथ, भारत समान नागरिक संहिता को अपना सकता है जो इसके लोकतांत्रिक मूल्यों को और भी मजबूत बनाएगा और एक न्यायसंगत समाज की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।

Uniform Civil Code India faqs

how anyone can submit his views on Uniform Civil Code.

Any one can submit his views on uniform civil code just visit official website and download notice click on link given and submit your thoughts.


समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) भारतीय संविधान के कोन से अनुच्‍छेद में उपलब्ध है।

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में आता है।

Uniform Civil Code क्‍या है

Uniform Civil Code समान नागरिक संहिता कानून पूरे देश में एक समान कानूनी सेट का प्रयोग करता है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेन, और विरासत कानून जैसे मामलों में समानता सुनिश्चित की जाए।

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